Khushi jha

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लेखनी कहानी -22-Dec-2021


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तेरे मेरे दरमियां है दुरियां बहुत,,
जिस्म से दुरी मगर,,,
रुह से जुड़ी है नजदीकियाँ बहुत।
ख्वाईश  पूरी दूनियाँ की दिल में 
बसी है,,
कुछ है जो नैनों की कशाकशी है,
तेरे मेरे दरमियां है खामोशियां बहुत,
सच है कि बोलती है आजकल 
तन्हाइयां बहुत।
जो कह ना सके लब्ज वो लफ्ज
बन आँखों में उतर आये है,,,
क्या कहे कि वो बिते मंजर याद आये हैं,
तेरे मेरे दरमियां है दुरियां बहुत,,
जिस्मों से की है दुरी मगर है नजदीकियाँ बहुत।

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खुशी

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1 Comments

Sachin dev

23-Dec-2021 12:52 PM

Very nice 👌

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